Stay connected with Mastana Music Academy for new music lessons and updates. Follow Now!
Posts

मूर्छना (Moorchhana)

📜 🏺 📜

मूर्छना: संगीत का प्राचीन आधार

Mastering the Ancient Scale System - Mastana Music Academy Archive

🎧 Audio Masterclass: मूर्छना पद्धति का पूर्ण विवेचन

Note: Is audio mein har moorchna ke swar-sthaan ko gaakar samjhaya gaya hai.

1. व्युत्पत्ति एवं दार्शनिक अर्थ

मूर्छना शब्द संस्कृत की 'मूर्छ' धातु से व्युत्पन्न है। इसका अर्थ है—"मूर्छित होना" या "चमकना"। संगीत के संदर्भ में, जब कोई स्वर अपनी सामान्य अवस्था से ऊपर उठकर एक नई रंजकता पैदा करता है, तो उसे मूर्छना कहते हैं।

भरत मुनि (नाट्यशास्त्र): "क्रमयुक्ताः स्वराः सप्त मूर्छनेत्यभिसंज्ञिताः।" अर्थात ग्राम के सात स्वरों का क्रमानुसार आरोह-अवरोह ही मूर्छना है। यह वह प्रक्रिया है जहाँ ग्राम के सातों स्वरों में से किसी एक को 'सा' (Tonic) मानकर पूरी सप्तक गाई जाती है।

2. मूर्छना के वैज्ञानिक नियम

ग्राम आधारित: मूर्छना का जन्म 'ग्राम' से होता है। षड्ज ग्राम की मूर्छनाओं में 'ध' 3 श्रुति का और मध्यम ग्राम में 'प' 3 श्रुति का होता है।
सम्पूर्णता: मूर्छना में 7 स्वर होने अनिवार्य हैं। 6 स्वर होने पर वह 'षाडव तान' और 5 होने पर 'औडव तान' बन जाती है।
क्रमानुसार: स्वरों का क्रम नहीं टूट सकता। यदि 'रे' से शुरू है तो अगला स्वर 'ग' ही होगा।
कुल संख्या: 3 ग्राम × 7 स्वर = 21 मूर्छनाएं। (आजकल गांधार ग्राम लुप्त है, इसलिए 14 ही प्रयोग में हैं)।

I. षड्ज ग्राम की 7 मूर्छनाएँ

(आधार: 4-3-2-4-4-3-2 श्रुति व्यवस्था)

नाम प्रारंभिक स्वर आधुनिक तुलना (थाट)
उत्तरमंद्रासा (षड्ज)काफी
रजनीनि (निषाद)बिलावल
उत्तरायताध (धैवत)-
शुद्ध षड्जाप (पंचम)आसावरी
मत्सरीकृताम (मध्यम)खमाज
अश्वक्रान्ताग (गांधार)कल्याण
अभिरुद्गतारे (ऋषभ)भैरवी

II. मध्यम ग्राम की 7 मूर्छनाएँ

नाम प्रारंभिक स्वर देवता
सौवीरीब्रह्मा
हरिणाश्वाइन्द्र
कलोपनतारेवायु
शुद्ध मध्यमासासूर्य
मार्गीनिचन्द्र
पौरवीअग्नि
हृदयका-

🌟 विशिष्ट जानकारी: मूर्छना के 4 प्रकार

पंडित शारंगदेव ने 'संगीत रत्नाकर' में साधारण (Overlap) स्वरों के आधार पर मूर्छना के 4 सूक्ष्म प्रकार बताए हैं:

  • 1. शुद्ध (Shuddha): जिसमें केवल ग्राम के शुद्ध स्वरों का प्रयोग हो।
  • 2. स-अंतर (S-Antar): जिसमें 'ग' के स्थान पर 'अंतर गांधार' का प्रयोग हो।
  • 3. स-काकली (S-Kakali): जिसमें 'नि' के स्थान पर 'काकली निषाद' का प्रयोग हो।
  • 4. स-अंतर-काकली: जिसमें अंतर 'ग' और काकली 'नि' दोनों का प्रयोग हो।

⚖️ मूर्छना बनाम आरोह-अवरोह: वैज्ञानिक अंतर

आजकल के विद्यार्थी दोनों को एक समझते हैं, पर इनमें बहुत बड़ा वैज्ञानिक अंतर है। आरोह-अवरोह केवल स्वरों के चढ़ने-उतरने का मार्ग है। मूर्छना 'Shift of Tonic' (Tonic shift) है।

जब हम आधार स्वर (Sa) को बदलते हैं, तो स्वरों के बीच का श्रुति-अंतराल (Frequency Ratio) बदल जाता है। इसी सिद्धांत से प्राचीन काल में एक ही ग्राम से कई अलग-अलग 'रागों' या 'मेल' का जन्म होता था। आधुनिक काल में इसे ही 'Scale Changing' कहा जाता है।

MASTANA MUSIC ACADEMY DIGITAL ARCHIVE

PRESERVING THE PURITY OF INDIAN CLASSICAL SOUND

complete guide to moorchna, shadaj gram madhyam gram gandhar gram moorchna, 21 moorchnas of indian music, moorchna vs aaroh avroh scientific difference, sangeet ratnakar moorchna types, mastana music academy archives, sunil mastana sangeet notes

Post a Comment

© Mastana Music Academy. All rights reserved. Distributed by P S Kathait