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संगीत की परिभाषा
🎧 Audio Lesson: संगीत का परिचय
सामान्य बोलचाल में संगीत से केवल गायन का अर्थ लिया जाता है, परन्तु शास्त्रीय दृष्टि से
गायन, वादन और नृत्य—इन तीनों के समन्वय को संगीत कहा जाता है।
संगीत रत्नाकर (पं० शारङ्गदेव)
“गीतं वाद्यं तथा नृत्यं त्रयं संगीत मुच्यते”
गायन, वादन और नृत्य परस्पर घनिष्ठ रूप से सम्बद्ध तथा एक-दूसरे के पूरक हैं। भाव-प्रदर्शन के लिए गायन या वादन के साथ होने वाली शारीरिक गतियाँ भी नृत्य के व्यापक अर्थ में सम्मिलित मानी जाती हैं। संगीत रत्नाकर के अनुसार नृत्य वादन पर तथा वादन गायन पर आश्रित है,
अतः गायन को संगीत का प्रधान अंग माना गया है।
📝 सार रूप में:
संगीत वह ललित कला है, जिसमें स्वर और लय के माध्यम से मानव अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति करता है। इसी कारण संगीत को सभी ललित कलाओं में सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त है।
— MASTANA MUSIC ACADEMY —